अंशुमान मैगजीन, चेयरमैन और सीईओ – भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका, सीबीआरई ने कहा। ‘‘उत्तर प्रदेश के राज्य बजट की सबसे बड़ी बात बुनियादी ढांचे के विस्तार, तकनीकी क्षेत्र में प्रगति और बड़े आर्थिक बदलाव की दिशा में ठोस कदम लेना है। इससे उत्तर भारत में विकास के मुख्य इंजन के तौर पर राज्य की स्थिति मजबूत होगी। आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे के लिए 900 करोड़ रु. के आवंटन और विंध्य एक्सप्रेसवे (50 करोड़ रु.), गंगा एक्सप्रेसवे एक्सटेंशन (50 करोड़ रु.) और बुंदेलखंड रीवा एक्सप्रेसवे (50 करोड़ रु.) के लिए शुरुआती प्रावधान किए जाने से इस क्षेत्र में संपर्क सुविधा बहुत बढ़ेगी जिससे नए निवेश गलियारे बनेंगे। इसके अलावा रक्षा औद्योगिक गलियारे के लिए 461 करोड़ रु.के आवंटन से उत्तर प्रदेश मजबूती के साथ औद्योगिक और रक्षा विनिर्माण का बड़ा केंद्र बन कर उभरेगा।इस बजट में तकनीकी पर पूरा ध्यान दिया गया है जिसका प्रमाण लखनऊ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी के लिए 5 करोड़ का और साइबर सुरक्षा प्रयासों के तहत एक टेक्निकल ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्क के लिए 3 करोड़ रु. का प्रावधान किया जाना है। इसमें एक दूरदर्शी दृष्टिकोण दिखता है जो इनोवेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देगा। एक मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के मद्देनजर आठ डेटा सेंटर पार्क बनाने की योजना है, जिसके परिणामस्वरूप यह राज्य तकनीक प्रधान निवेशों के लिए और आकर्षक हो जाएगा। इससे दुनिया के डेटा सेंटर हब के रूप में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।इसके अलावा, मथुरा-वृंदावन में बांके बिहारी जी महाराज मंदिर कॉरिडोर के लिए 100 करोड़ रु. और मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी मंदिर के विकास के लिए 200 करोड़ रु. का आवंटन कर आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया है। राज्य की 58 नगर पालिकाओं को स्मार्ट सीटी में बदलने की पहल से शहरी बुनियादी ढांचा बेहतर और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।उत्तर प्रदेश इस तरह के रणनीतिक निवेशों के दम पर विभिन्न व्यवसायों, प्रौद्योगिकी उद्यमों और दीर्घकालिक विकास के अवसरों की तलाश कर रहे निवेशकों के लिए मनपसंद मंजिल बनने के लिए तैयार है,’’